ज्योतिष, राजनीति और जीवन का यथार्थ: डॉ. वाई राखी से ख़ास बातचीत

नमस्ते दोस्तों, अक्सर हम अपने जीवन को अपनी मेहनत और फैसलों का परिणाम मान लेते हैं, लेकिन परिस्थितियाँ बार-बार जब हमारे कैलकुलेशन और कल्पना के विपरीत आने लगती हैं, तब हम सोचने को मजबूर होते हैं कि बात इतनी ही नहीं है। हमारी किस्मत की डोर सिर्फ हमारे ही हाथ में नहीं है, ग्रह नक्षत्र भी कहीं न कहीं उसमें रोल प्ले कर रहे हैं। और ऐसे में जब हम एस्ट्रोलॉजी की तरफ मुड़ते हैं, उनकी बारीकियों को समझने की कोशिश करते हैं, तो एक नाम बरबस ही हमारे जुबान पर आता है— डॉ. वाई राखी, जिनके प्रेडिक्शन शब्दशः सच हुए हैं। जिनके बताए हुए उपाय लोगों की मुश्किल भरी जिंदगी में बहार लेकर आए हैं। आज उनके चाहने वालों की संख्या लाखों नहीं, करोड़ों में है— देश ही नहीं विदेशों में है।

हाल ही में एक मुलाकात में, डॉ. राखी ने अपनी निजी जिंदगी, ज्योतिष के सफर और देश-दुनिया की राजनीति पर खुलकर बात की।

संघर्ष से सफलता तक का सफ़र

डॉ. वाई राखी ने अपने जीवन के शुरुआती संघर्षों को स्वीकार किया। उनका जन्म 1970 में हुआ और उस दौर की हर मिडिल क्लास फैमिली की तरह उन्होंने भी बहुत संघर्ष देखा। उन्होंने बताया कि किस तरह पिता को कम उम्र में खोने के बाद उन्हें मौसी के घर रहना पड़ा और वनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाई के लिए भी उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

ज्योतिष के क्षेत्र में आना उनका पूर्व-निश्चित रास्ता नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके खानदान में कोई ज्योतिषी नहीं था। उन्होंने टैरो (Tarot), फेंगशुई (Feng Shui), वास्तु और रेकी (Reiki) के माध्यम से शुरुआत की और फिर ज्योतिष की ओर रुख किया।

“गरीबी से बाहर निकालने के लिए ही उन्हीं के बच्चे स्ट्रगल करके आगे बढ़ते हैं।”

उनका मानना है कि सफलता केवल अमीर घरों में पैदा होने से नहीं मिलती, बल्कि टैलेंट और संघर्ष से मिलती है। उन्होंने अपनी तरक्की का श्रेय अपने पति को दिया, जिनसे उन्होंने लव मैरिज की।

“मेरे करियर मेरी जिंदगी में जो चेंज आया वो मेरे हस्बैंड तेलुगु ब्राह्मण हैं और मैं पंजाबी हूं… उनसे शादी करने के बाद मेरा भाग्य उदय हुआ।”


सुबह उठने का महात्म्य और कर्म का सिद्धांत

डॉ. राखी ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण नियम साझा किया: सुबह जल्दी उठना। उन्होंने बताया कि हॉस्टल के दिनों की मजबूरी ने उन्हें 3:30 बजे उठना सिखाया, और यह उनकी आदत बन गई।

“यह यथार्थ सत्य है कि सुबह उठने से आप जीवन में सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं। आप मेरी बात बिल्कुल नहीं मानिए, उठकर देखिए। आपको 100% रिजल्ट मिलेंगे।”

लेकिन उनका जोर केवल उठने पर नहीं, बल्कि सुबह के समय को सकारात्मक कर्म में लगाने पर है— भगवान से जुड़ना, सूरज को जल देना, मैनिफेस्ट करना, और नंगे पैर वॉक करना।

उन्होंने कर्म सिद्धांत पर ज़ोर देते हुए कहा: “अच्छा नहीं कर सकते, बुरा मत करो। जियो और जीने दो।” उन्होंने लोगों से नकारात्मकता और दूसरों के लिए गलत बोलने से बचने की अपील की।


प्रेम विवाह और पारिवारिक सहमति

प्रेम विवाह पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि माता-पिता को दुख पहुंचाकर की गई शादी सफल नहीं हो सकती।

हृदय तोड़कर किसी के हृदय को पाना यह कभी सक्सेस नहीं हो सकता। माँ-बाप के दिल को दुखाकर जो बच्चे शादी करते हैं, वह सुखी नहीं रहते।”

उन्होंने कहा कि अगर परिवार अंतरजातीय विवाह के खिलाफ है, तो पहले ही इस बात को स्पष्ट कर देना चाहिए। सच्चे प्रेम के लिए उन्होंने राधा-कृष्ण की पूजा करने और गायत्री मंत्र का पाठ करने की सलाह दी, साथ ही माता-पिता को मनाने के लिए पुरजोर कोशिश करने को कहा।


राजनीतिक भविष्यवाणियाँ: बिहार और बंगाल

डॉ. राखी ने अपनी भविष्यवाणियों को लेकर कहा कि वह डर के मारे अच्छा नहीं बोल सकतीं, क्योंकि जब परिस्थितियाँ खराब हों, तो झूठी उम्मीद देना सही नहीं है।

“जब अच्छा है ही नहीं तो अच्छा बोलूं कैसे? मैं अच्छा बोल दूंगी तो दो दिन बाद यही लोग बोलेंगे, अरे आपने तो बोला था ये हो जाएगा।”

बिहार चुनाव

बिहार के संदर्भ में, जहाँ 22 नवंबर को कार्यकाल खत्म हो रहा है, उन्होंने नीतीश कुमार के दोबारा मुख्यमंत्री बनने की संभावना को कम बताया।

“मुझे सत्ता बदलती हुई भी दिख रही है… बीजेपी आ भी सकती है और नहीं भी आ सकती। मतलब बहुत कांटे की टक्कर का रहेगा। 50−50 के चांसेस हैं।”

उन्होंने तेजस्वी यादव के सुर्खियों में रहने और उनकी इमेज, हेल्थ और वेल्थ को लेकर अच्छा समय न होने की बात कही। साथ ही, नवंबर तक बिहार में हिंसा, झगड़े और राजनीति के गिरते स्तर की आशंका जताई। उन्होंने चिराग पासवान को उभरते हुए चेहरे के तौर पर देखा, जिनकी कुंडली और समय अच्छा है।

बंगाल का भविष्य

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री दीदी (ममता बनर्जी) के लिए डॉ. राखी ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ और राजनीतिक अस्थिरता का संकेत दिया।

“मुझे ऐसा लगता है खेला होवे। बंगाल में भी हिंसा बहुत दिखाई देगी। लेकिन इस बार दीदी बंगाल की मुख्यमंत्री नहीं बनेगी।”

उन्होंने कहा कि बंगाल में उन्हें सत्ता परिवर्तन साफ दिखाई दे रहा है, और यहाँ कोई कांटे की टक्कर नहीं होगी।


विश्व पटल पर संकट

पहलगाम और आतंकवाद

डॉ. राखी ने कहा कि आतंकवादी हमले के पहलगाम जैसे हादसों की खबर फिर से आ सकती है, क्योंकि भारत की मंगल की महादशा शुरू हो गई है। उन्होंने मोदी सरकार द्वारा कड़ा जवाब देने और नए कानून बनाने की भविष्यवाणी की।

रूस-यूक्रेन युद्ध

उन्होंने कहा कि यह युद्ध अभी खत्म होता नहीं दिखाई दे रहा, बल्कि इसमें और देशों का हस्तक्षेप बढ़ रहा है। उनका मानना है कि अगर यह युद्ध खत्म हो सकता है, तो केवल नरेंद्र मोदी जी की मध्यस्थता से, क्योंकि मंगल सेनापति का काम करता है।


डॉ राखी की अन्य भविष्यवाणियां और धार्मिक विचार

ट्रंप और अंतर्राष्ट्रीय छात्र

डोनाल्ड ट्रंप की शनि की साढ़े साती शुरू होने की बात कहते हुए उन्होंने उनके लिए बुरा वक्त बताया। 11 नवंबर को देवगुरु बृहस्पति के वक्री होने के कारण, उन्होंने भारतीय छात्रों के अमेरिका, लंदन आदि देशों से वापस घर लौटते हुए दिखने की भविष्यवाणी की, क्योंकि यह छात्रों पर सीधा प्रभाव डालेगा।

मंगल का सकारात्मक प्रभाव

हालांकि 2025 तक का समय संघर्ष भरा है, मंगल (जो खेलों का कारक है) की महादशा के कारण, भारत को उन खेलों में बहुत सारे मेडल्स मिलेंगे जो लंबे समय से बंद थे या जिनमें भारत ने कोई बड़ी जीत हासिल नहीं की थी।

व्रत और नियम

डॉ. राखी ने व्रत रखने के तरीकों पर बात की और कहा कि पूरे भारतवर्ष में अगर कोई सही तरीके से व्रत रखता है, तो वह बिहार और गुजरात के लोग हैं। उन्होंने पंजाबी लोगों के व्रत रखने के तरीकों को “गंदा” बताते हुए कहा कि व्रत में चिप्स, बिस्किट या बाजार की थाली नहीं खानी चाहिए। उन्होंने जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत और छठ को बिहार की अद्भुत परंपरा बताया और बिहार के लोगों को कोटि-कोटि प्रणाम किया।

“बिहारियों जैसा व्रत कोई नहीं रख सकता। इसलिए तो हर दूसरे घर में एक आईएएस है।”

उन्होंने कहा कि भगवान केवल भाव के भूखे हैं, इसलिए चाहे मंदिर में शिवलिंग को छूना हो या घर पर मूर्ति रखना, नियम से ज्यादा भाव और निष्ठा महत्वपूर्ण है।

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