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मिडिल क्लास गरीब क्यों होता जा रहा है? Business Coach Basesh Gala ने बताया।

क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी सैलरी तो बढ़ती रहती है, लेकिन आपका बैंक बैलेंस उस रफ़्तार से नहीं बढ़ता? आपके पास नया iPhone और महंगे कपड़े हैं, और आप हर वीकेंड कैफ़े में खाना खाते हैं—तो फिर आपकी जेब हमेशा खाली क्यों रहती है? इसका सीधा सा जवाब यह है: हम अमीर बनना नहीं चाहते; हम बस अमीर दिखना चाहते हैं

हाल ही में “The Arvindams” पॉडकास्ट पर बिजनेस कोच Basesh Gala ने इसी विषय पर गहरी बातचीत की। उन्होंने कुछ ऐसे कड़वे सच बताए, जो हर मिडिल क्लास भारतीय को आईना दिखाने के लिए काफी हैं। आइए समझते हैं कि आखिर मिडिल क्लास गरीब क्यों होता जा रहा है और इसका समाधान क्या है।

1. “Look Rich” का जाल – दिखावे की अमीरी

Basesh Gala ने पॉडकास्ट में एक बहुत जरूरी सवाल पूछा – “Do you want to be rich or do you want to look rich?” यानी क्या आपको सच में अमीर बनना है, या सिर्फ समाज को अमीर दिखना है?

आज का ट्रेंड यही है कि 20,000 रुपये कमाने वाला लड़का 7,000 रुपये की ईएमआई पर नवीनतम आईफोन खरीद लेता है। क्यों? क्योंकि ऑफिस में सबके पास नया फोन है। कल को नया मॉडल आएगा और यह फोन बेकार हो जाएगा, लेकिन ईएमआई 5 साल तक चुकानी पड़ेगी। यह सिर्फ फोन की बात नहीं है। लोग कोल्डप्ले कॉन्सर्ट का 50,000 का टिकट इसलिए खरीद रहे हैं क्योंकि इंस्टाग्राम पर फोटो डालनी है, भले ही उन्हें उस बैंड का एक भी गाना पसंद न हो।

गाला सर के अनुसार, 75% मिडिल क्लास लोग अपने वेकेशंस भी पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड पर करते हैं। यह “लुक कूल” का चक्कर हमें उस जाल में फंसा रहा है, जहां हम अपने भविष्य की कमाई आज के दिखावे पर खर्च कर रहे हैं।

सच यह है: असली अमीर लोग ब्रांडेड लोगो वाले कपड़े कम पहनते हैं। रतन टाटा करोड़ों के मालिक होकर Tata Nano में घूमते थे, जबकि लोन पर दबा मिडिल क्लास Mercedes की EMI भर रहा है – सिर्फ “बाजू वाले को जलाने” के लिए।

2. Instagram के 30 Seconds vs 30 साल की रगड़

हमने अपनी दुनिया को 30 सेकंड के रील्स में तोलना शुरू कर दिया है। डॉली चाय वाला वायरल हुआ तो लगता है कि बस चाय की दुकान खोलो और बिल गेट्स आ जाएंगे। लेकिन Basesh Gala ने इस भ्रम को तोड़ते हुए कहा, “बेटा, 30 सेकंड का खेल नहीं है, 30 साल रगड़ना पड़ेगा।”

आज की युवा पीढ़ी हार्ड वर्क से भागना चाहती है। सबको शॉर्टकट चाहिए – बटन दबाओ और करोड़पति बनो। कोई सेल्स की नौकरी नहीं करना चाहता क्योंकि उसमें धूप में घूमना पड़ता है, बल्कि रात को Zomato-Swiggy करके तुरंत के 1500 रुपये कमाना ज्यादा आसान लगता है। यह इंस्टेंट फेम और शॉर्टकट की मानसिकता मिडिल क्लास को गरीबी की ओर धकेल रही है।

सच तो यह है कि जो लोग चुपचाप मेहनत करते हैं, वही आगे बढ़ते हैं। Basesh Gala ने “बिल्ड इन साइलेंस” का मंत्र दिया। जैसे ही आप जल्दी नजर में आते हैं (शोऑफ से), कंपटीशन, गवर्नमेंट और लोगों की बुरी नजर का शिकार हो जाते हैं। पहले अपनी नींव मजबूत करो, फिर उछलो।

3. फ्री की रेवड़ी संस्कृति और मेहनत से भागना

गाला सर ने एक विवादित लेकिन सच बात कही – “हमारी डेमोक्रेसी देश को गरीब बना रही है।” उनका इशारा उस फ्री की रेवड़ी संस्कृति की ओर था, जहां वोट पाने के लिए फ्री अनाज, फ्री बिजली और हर महीने 1500 रुपये देने के वादे किए जाते हैं।

इसका परिणाम यह होता है कि एक बड़ा वर्ग यह सोचने लगता है कि अगर रोटी, कपड़ा और मकान सरकार दे ही रही है, तो मेहनत करने की जरूरत ही क्या है? युवा समय बर्बाद करता है, क्योंकि उसकी बेसिक जरूरतें बिना स्किल के पूरी हो रही हैं। लेकिन जब 30 की उम्र आती है और शादी, घर और बच्चों की जिम्मेदारी आती है, तब पता चलता है कि न तो स्किल है, न जुनून, न पैसा। फिर वही आदमी मिडिल क्लास से लोअर मिडिल क्लास की ओर खिसक जाता है।

तो क्या नौकरी करके अमीर नहीं बना जा सकता? (मिथक तोड़ना)

बिल्कुल बन सकते हैं! Basesh Gala ने एक जबरदस्त उदाहरण दिया। उनके एक कर्मचारी सोहेल ने पहले दुबई के एक कैफे में बाथरूम साफ किए। फिर वे DMart में काम करने आए। वहां उन्होंने इतनी ईमानदारी से काम किया कि कंपनी ने उन्हें 1 लाख शेयर (ESOPs) दिए। जब DMart का IPO आया, तो उनके शेयर बिके और आज उनके बैंक अकाउंट में ₹40 करोड़ हैं।

सबक: अगर आप कंपनी को अपना समझकर काम करते हैं, और मालिक के पास विजन और उदारता है, तो एक सैलरीड इंसान भी करोड़पति बन सकता है। दिक्कत यह है कि हम सिर्फ 9 से 5 की मानसिकता से काम करते हैं।

समाधान: 25/75 का नियम और सेविंग्स की ताकत

गाला सर का मानना है कि इनकम बढ़ाने से ज्यादा जरूरी सेविंग्स है। उन्होंने 25/75 का रेश्यो दिया – 25% ध्यान इनकम बढ़ाने पर, 75% ध्यान बचत और निवेश पर।

  • थायरोकेयर का उदाहरण: कंपनी के संस्थापक वेलुमनी जी ने हमेशा सिंपल जीवन जिया। छोटा घर, छोटी गाड़ी और सादा स्कूल। जब सब दोस्त EMI में फंसे थे, उन्होंने पैसा बचाया। जब मौका आया, तो उन्होंने नौकरी छोड़कर अपनी कंपनी शुरू की और आज थायरोकेयर 4500 करोड़ की कंपनी है।
  • किडनैप टेस्ट: गाला सर बिजनेसमैन से पूछते हैं कि अगर तुम्हें 30 दिन के लिए स्विट्जरलैंड किडनैप कर लिया जाए और फोन न हो, तो कंपनी चलेगी? अगर जवाब “नहीं” है, तो आप बिजनेस मैन नहीं, बल्कि “रामू काका” हैं – यानी अपनी ही दुकान के गुलाम।

सेविंग्स आपको रिस्क लेने की ताकत देती है। जिसके पास पैसा होगा, वही बड़ा दांव खेल पाएगा।

आज के समय में सबसे बड़ा हथियार – AI और स्किल्स

Basesh Gala ने साफ कहा कि अब डिग्रियों की वैल्यू जीरो है। अगर आपके पास कम्युनिकेशन और AI की स्किल है, तो आप गरीब रह ही नहीं सकते। उन्होंने अपनी वेबसाइट Basesh ugal.com पर एक फ्री AI टूल बनाया है, जो आपके बिजनेस सवालों का जवाब देता है। यह एआई उनके 4000 क्लाइंट्स के अनुभव से ट्रेंड है।

चाहे आपको वीडियो एडिटर हायर करना हो या मार्केटिंग की स्ट्रेटेजी चाहिए, यह टूल आपकी मदद कर सकता है। उनका मानना है कि AI एक ऐसा इंटर्न है जो 24×7 काम करता है, थकता नहीं और सैलरी नहीं मांगता।

निष्कर्ष: 3S का मंत्र

अंत में Basesh Gala ने भारत के हर मिडिल क्लास को सिर्फ 3 चीजें याद रखने को कहा:

1. सिंपलीसिटी (Simplicity): दिखावे के लिए मत जियो। अपने शौक पूरे करो, लेकिन समाज को दिखाने के लिए लोन मत लो।
2. सेविंग्स (Savings): आप 5,000 कमाओ और 2,500 बचाओ, तो आप 5 लाख कमाकर सब उड़ाने वाले से ज्यादा अमीर हो।
3. स्किल्स (Skills): डिग्री नहीं, स्किल भविष्य है। सेल्स, नेटवर्किंग और AI – ये तीनों सीख लो तो करोड़पति बनना कोई सपना नहीं।

याद रखिए, “जो दिखता है वो बिकता है, लेकिन जो ज्यादा उछलता है, वो मरता है।” इसलिए चुपचाप मेहनत करिए, पैसा बचाइए, और सही समय आने पर दुनिया को दिखाइए कि असली अमीरी क्या होती है।

क्या आप भी इसी जाल में फंस चुके हैं? कमेंट में बताइए कि आपकी सबसे बड़ी फाइनेंशियल गलती क्या रही है?

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