आज के समय में ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां यह बीमारी 50 से 60 साल के लोगों में देखने को मिलती थी, वहीं अब 30 से 40 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। जिम में वर्कआउट करने वाले, चलते फिरते और फिजिकल एक्टिविटी करने वाले लोग भी अचानक हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर परमेश्वर अरोड़ा के अनुसार इसके पीछे कई ऐसे कारण हैं जिन पर हम ध्यान नहीं देते। यह लेख उन्हीं कारणों, लक्षणों और समाधान पर केंद्रित है।
ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक क्या है
ब्लड प्रेशर की परिभाषा बहुत सरल है। यह वह प्रेशर है जो हमारा खून आर्टरी की दीवार पर डालता है। अगर आर्टरी लचीली है तो वह फैल जाती है और प्रेशर कम महसूस होता है। अगर आर्टरी सख्त या सूखी हो गई है तो प्रेशर अधिक महसूस होता है।
हार्ट अटैक तब होता है जब हार्ट को ब्लड सप्लाई करने वाली आर्टरी में क्लॉट या ब्लॉकेज बन जाता है। यह क्लॉट अचानक ब्लड फ्लो को रोक देता है और हार्ट की मसल्स को नुकसान पहुंचता है। कभी यह क्लॉट ब्रेन में पहुंच जाता है तो ब्रेन डेथ तक हो जाती है।
डॉक्टर अरोड़ा के अनुसार आर्टरी की जो फ्लैक्सिबिलिटी होती है वह घी और तेल की चिकनाहट से बनी रहती है। जब यह चिकनाहट खत्म हो जाती है तो आर्टरी सूखने लगती है और ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।
लक्षण क्या हैं
हार्ट अटैक के लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते। कई बार 80 प्रतिशत ब्लॉकेज होने के बाद भी कोई संकेत नहीं मिलता। लेकिन कुछ चेतावनी संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
- सीने में बेचैनी या दर्द होना
- सीने में चुभन महसूस होना
- बिना कारण सांस फूलना
- सीढ़ी चढ़ने या चलने में जल्दी थकान होना
- बिना खांसी, जुकाम या अस्थमा के सांस चढ़ना
- बाएं हाथ, कंधे या जबड़े में दर्द फैलना
- सीने के बीचोंबीच दर्द होना जिसे रेट्रोस्टर्नल पेन कहते हैं
डॉक्टर अरोड़ा के अनुसार अगर सीने के बीच में दर्द है तो इसे गैस समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से मिलें। गैस का दर्द और हार्ट का दर्द अलग होता है। गैस की गोली या अजवाइन खाने के पांच मिनट बाद भी अगर राहत न मिले तो यह हार्ट का दर्द हो सकता है।
हार्ट अटैक का दर्द कभी भी किसी भी तरफ फैल सकता है। यह सिर्फ बाईं तरफ ही नहीं होता। इसलिए किसी भी तरह के सीने के दर्द को हल्के में न लें।
क्या खाएं
डॉक्टर अरोड़ा के अनुसार भोजन ही सबसे बड़ी दवा है। अगर खानपान सही है तो कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
- घी खाएं लेकिन असली घी। देसी गाय के दूध से बना घी। पैकेट के दूध से बना घी नहीं।
- तेल खाएं। खाने के लिए सरसों का तेल और लगाने के लिए तिल का तेल।
- भैंस का दूध पिएं। इसमें फैट अधिक होता है इसलिए इसे पतला करके पिएं।
- दूध में हल्दी, सोंठ या पिपली डालकर उबालें। कभी अकेले दूध न पिएं।
- देसी नस्ल की गाय का दूध या भैंस का दूध इस्तेमाल करें।
- खिचड़ी खाएं। यह बीमार व्यक्ति को भी पच जाती है।
- चने का आटा और सत्तू खाएं।
- पानी सम मात्रा में पिएं। अधिक या कम नहीं।
- 24 घंटे में तीन बार स्मूद यूरिन आउटपुट होना चाहिए जो लगभग 750 मिलीलीटर है।
- रात में सुप्रज्ञा लेकर सोएं। यह मानसिक तनाव कम करती है।
- अर्जुन की छाल का पाउडर एक कप दूध और एक कप पानी में आधा चम्मच डालकर पांच मिनट उबालें। जब केवल दूध बच जाए तो छानकर पिएं। इसे अर्जुन क्षीरपाक कहते हैं।
- यकृत सार टैबलेट दिन में दो बार तीन महीने तक लें। यह क्लॉट बनने की संभावना कम करती है।
- 45 मिनट से एक घंटा रोज सुबह ब्रिस्क वॉक करें।
- कम से कम सात घंटे की नींद लें।
क्या न खाएं
डॉक्टर अरोड़ा के अनुसार कुछ चीजें ऐसी हैं जो सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारी बढ़ाती हैं। इनसे दूरी बनाना बहुत जरूरी है।
- दही बिल्कुल बंद कर दें। खासकर हार्ट और बीपी के मरीजों को। दही खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट में ब्लॉकेज होती है। रात में तो कभी न खाएं।
- पैकेट का दूध न पिएं। इसमें यूरिया, डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा तक मिलाया जाता है।
- विदेशी नस्ल की गाय का दूध न पिएं। यह A1 टाइप मिल्क है जो हार्ट, आर्टरी और पैंक्रियाज को नुकसान पहुंचाता है।
- नमक कम खाएं। दिन में दो ग्राम से अधिक नहीं। 60 ग्राम की डिब्बी बनाएं जो एक महीने में खत्म हो।
- सेंधा नमक को अनलिमिटेड न समझें। यह भी नमक ही है।
- चीनी कम खाएं। यह मोटापा बढ़ाती है और आर्टरी में जमा होती है।
- मैदा न खाएं। यह बारीक पिसा हुआ गेहूं है जिसमें चोकर नहीं होता।
- बेसन कम खाएं। चने का आटा बेहतर है।
- रात में देर तक न जागें। यह वात दोष बढ़ाता है।
- अधिक पानी न पिएं। यह ब्लड प्रेशर को और बढ़ाता है।
- तनाव न लें। मानसिक तनाव सीधे वात दोष बढ़ाता है जो आर्टरी को सुखाता है।
- अधिक मात्रा में गरिष्ठ भोजन न खाएं।
- पिज्जा, बर्गर, समोसा और पकोड़े न खाएं।
- तेल और घी को पूरी तरह न छोड़ें। इससे आर्टरी की लुब्रिकेशन खत्म हो जाती है और बीमारी और बढ़ती है।
नुकसान अगर कोई हो तो
अगर आपने गलत खानपान या लापरवाही की है तो शरीर संकेत देता है। इन संकेतों को पहचानें और तुरंत कदम उठाएं।
- अगर ब्लड प्रेशर बढ़ रहा है और दवाइयां भी बढ़ रही हैं तो समझें कि इलाज सही दिशा में नहीं है।
- अगर ब्लड प्रेशर कंट्रोल हो रहा है और दवाइयां कम हो रही हैं तो समझें कि रास्ता सही है।
- अगर 15 साल से दवा ले रहे हैं तो भी घबराएं नहीं। पानी सही करें, दही छोड़ें, नमक कम करें और डॉक्टर की निगरानी में दवा धीरे धीरे कम करें।
- अगर किडनी कमजोर है तो ब्लड प्रेशर बनता है। सिर्फ बीपी की दवा देने से किडनी की बीमारी आगे बढ़ती रहती है। किडनी का इलाज जरूरी है।
- अगर यूरिया और क्रिटिनाइन नॉर्मल है तो भी किडनी 70 से 80 प्रतिशत तक डैमेज हो सकती है। इसलिए सिर्फ रिपोर्ट देखकर संतुष्ट न हों।
- अगर सीने में दर्द है और गैस की दवा से राहत नहीं मिल रही तो तुरंत अस्पताल जाएं। यह हार्ट अटैक हो सकता है।
- अगर ईसीजी नॉर्मल है तो भी ब्लॉकेज नहीं है यह मानने की गलती न करें। ईसीजी केवल दर्द के समय गड़बड़ आता है।
- अगर चेस्ट पेन है तो सोर्बिट्रेट की गोली जीभ के नीचे रखें। यह लाइफ सेविंग हो सकती है।
- अगर ब्लड प्रेशर फ्लक्चुएट हो रहा है तो यह हाई या लो बीपी से भी ज्यादा खतरनाक है। यह हार्ट के अस्थिर होने का संकेत है।
- अगर दवा से बीपी कंट्रोल है लेकिन 10 साल बाद नेफ्रोपैथी आ गई तो समझें कि दवा ने सिर्फ बीमारी दबाई है, ठीक नहीं किया।
निष्कर्ष
डॉक्टर परमेश्वर अरोड़ा के अनुसार ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक के लिए हमारा खानपान, दिनचर्या और जीवनशैली सबसे बड़े जिम्मेदार हैं। पैकेट का दूध, नकली घी, दही, नमक, चीनी, मैदा और तनाव ये सब मिलकर शरीर में वात दोष बढ़ाते हैं जो आर्टरी को सुखाता है और ब्लॉकेज पैदा करता है।
समाधान बहुत सरल है। पानी सही करें। नमक कम करें। दही छोड़ें। असली घी और तेल खाएं। रोज 45 मिनट वॉक करें। सात घंटे सोएं। तनाव कम करें। और सबसे महत्वपूर्ण यह कि डॉक्टर की निगरानी में रहें।
शरीर हमेशा संकेत देता है। जरूरत है उन संकेतों को समझने की और सही समय पर सही कदम उठाने की। बड़ी बीमारियां छोटी छोटी गलतियों से ही शुरू होती हैं। इसलिए आज से ही अपनी जीवनशैली सुधारें और स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ़ शिक्षा के मकसद से है और यह किसी प्रोफेशनल मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है। सेहत, खान-पान या दवा में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा किसी क्वालिफाइड डॉक्टर से सलाह लें। किसी भी नतीजे के लिए चैनल और गेस्ट ज़िम्मेदार नहीं हैं।


