हार्ट अटैक आज के समय की सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। पहले यह बीमारी 60 से 70 साल की उम्र में होती थी, लेकिन अब 23 से 35 साल के युवाओं में भी देखी जा रही है। कई युवा जो देखने में पूरी तरह फिट लगते हैं, उन्हें अचानक हार्ट अटैक आ जाता है और कई बार मौत हो जाती है। सबसे चिंता की बात यह है कि दिल के डॉक्टर भी इस बीमारी से नहीं बच पा रहे हैं। ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी है कि हार्ट अटैक क्या है, यह क्यों हो रहा है, क्या खाना चाहिए और अगर किसी को यह समस्या हो तो क्या करना चाहिए।
हार्ट अटैक क्या है?
हार्ट अटैक को मेडिकल भाषा में मायोकार्डियल इन्फार्क्शन कहते हैं। हमारे दिल में तीन मुख्य पाइप होते हैं जिन्हें कोरोनरी आर्टरी कहते हैं। ये पाइप दिल की मांसपेशियों तक खून पहुंचाते हैं। जब इनमें से किसी पाइप में चर्बी जमा हो जाती है और वहां खून का थक्का बन जाता है, तो दिल तक खून पहुंचना बंद हो जाता है। खून न मिलने से दिल की मांसपेशियां मरने लगती हैं। इसी स्थिति को हार्ट अटैक कहते हैं।
लेकिन हार्ट अटैक केवल पाइप बंद होने से नहीं होता। दिल में एक और व्यवस्था होती है जिसे इलेक्ट्रिकल सिस्टम कहते हैं। यह दिल की धड़कन को नियंत्रित करता है। जब इस इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी होती है, तो दिल की धड़कन अचानक रुक जाती है। इसे सडन कार्डियक अरेस्ट कहते हैं। यह स्थिति और भी खतरनाक है क्योंकि इसमें मरीज को बचाने का समय बहुत कम मिलता है।
हार्ट अटैक क्यों हो रहा है?
हार्ट अटैक के कारणों को समझना जरूरी है क्योंकि यही हमारी रोजमर्रा की गलतियों से जुड़े हुए हैं।
खानपान में गड़बड़ी
हमारी भारतीय थाली में प्रोटीन की मात्रा बहुत कम है। हम रोटी, चावल और आलू ज्यादा खाते हैं लेकिन दाल, पनीर, अंडा और दूध कम खाते हैं। प्रोटीन कम खाने से मांसपेशियां कमजोर होती हैं और शरीर में फैट बढ़ता है। इस स्थिति को सार्कोपीनिक ओबेसिटी कहते हैं। इसमें वजन तो सामान्य रहता है लेकिन मांसपेशियां खत्म हो जाती हैं और पेट के अंदर चर्बी बढ़ जाती है। यही चर्बी दिल की बीमारी का सबसे बड़ा कारण है।
रिफाइंड तेल का इस्तेमाल
रिफाइंड तेल को बनाने में उसे 3000 डिग्री तक गर्म किया जाता है। इस प्रक्रिया में उसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और वह शरीर के लिए हानिकारक बन जाता है। विदेशों में इस तेल को कूड़े में फेंक दिया जाता है लेकिन हम इसे खाने में इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे शरीर में विटामिन डी की कमी होती है, हड्डियां कमजोर होती हैं और दिल पर दबाव बढ़ता है।
नॉन स्टिक बर्तन
नॉन स्टिक बर्तनों पर टेफलॉन की परत होती है। जब इन पर खरोंच आ जाती है तो यह परत खाने में मिल जाती है। टेफलॉन एक ऐसा पदार्थ है जो शरीर से बाहर नहीं निकलता और सालों तक शरीर में रहता है। यह धीरे धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
नमक और पोटेशियम
नमक दो प्रकार का होता है। एक सोडियम क्लोराइड जिसे हम आम नमक कहते हैं और दूसरा पोटेशियम क्लोराइड जिसे सेंधा नमक कहते हैं। सेंधा नमक में पोटेशियम की मात्रा ज्यादा होती है। जिन लोगों की किडनी ठीक से काम नहीं कर रही, उनके शरीर से पोटेशियम बाहर नहीं निकल पाता। ऐसे में सेंधा नमक खाने से पोटेशियम बहुत बढ़ जाता है जिससे दिल की धड़कन गड़बड़ा जाती है और मौत हो सकती है।
चीनी और कार्बोहाइड्रेट
हमारे शरीर को दिन भर में केवल 5 ग्राम शक्कर की जरूरत होती है। लेकिन हम चाय, मिठाई, जलेबी, रसगुल्ला और कोल्ड ड्रिंक से 20 से 30 ग्राम शक्कर ले लेते हैं। इससे पैंक्रियाज को बार बार इंसुलिन बनाना पड़ता है और वह थक जाता है। यही डायबिटीज का कारण बनता है और डायबिटीज हार्ट अटैक का सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर है।
नींद और तनाव
आज हम रात 3 बजे तक मोबाइल चलाते हैं। शरीर की प्राकृतिक दिनचर्या खत्म हो गई है। कम नींद से शरीर को आराम नहीं मिलता और तनाव बढ़ता है। तनाव से एड्रिनलीन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन निकलते हैं जो दिल पर सीधा असर डालते हैं। लड़ाई झगड़ा और गुस्सा भी ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है जो हार्ट अटैक का कारण बनता है।
स्मोकिंग और शराब
सिगरेट दिल का सबसे बड़ा दुश्मन है। इससे खून की नलियां सिकुड़ जाती हैं और खून का थक्का बनने लगता है। शराब लीवर को खराब करती है और शरीर में चर्बी बढ़ाती है।
क्या खाना चाहिए?
हार्ट को स्वस्थ रखने के लिए खानपान में बदलाव सबसे जरूरी है।
- प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएं। रोज एक कटोरी दाल, आधा ब्रिक पनीर, दो उबले अंडे या एक गिलास दूध जरूर लें।
- देसी घी, सरसों का तेल, नारियल तेल और तिल का तेल इस्तेमाल करें। रिफाइंड तेल पूरी तरह बंद कर दें।
- साबुत मसाले इस्तेमाल करें। पिसे और पैक किए हुए मसालों में मिलावट होती है।
- हरी सब्जियां, सलाद और फल ज्यादा खाएं। चावल और रोटी कम खाएं लेकिन सब्जी उससे चार गुना ज्यादा खाएं।
- चीनी और मिठाई कम करें। एक जलेबी खानी है तो आधी खाएं, पूरी नहीं।
- नमक सामान्य इस्तेमाल करें। अगर किडनी की बीमारी है तो सेंधा नमक बिल्कुल न खाएं।
- पानी पर्याप्त पिएं। आमतौर पर 3 लीटर पानी पर्याप्त है। लेकिन हार्ट फेलियर या किडनी की बीमारी में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
- खाना समय पर खाएं और ज्यादा न खाएं। जितनी भूख है उतना ही खाएं।
- खाने के बाद तुरंत भारी काम या व्यायाम न करें। दो घंटे आराम करें।
क्या करें अगर किसी को हार्ट अटैक हो जाए?
अगर किसी को अचानक सीने में दर्द हो, बाईं तरफ दर्द फैले, पसीना आए, सांस फूले या बेहोशी हो तो तुरंत ये करें।
- मरीज को तुरंत आराम से लिटाएं। उसे चलने या खड़े होने न दें।
- मरीज को कसकर बैठाएं नहीं, बल्कि सहारा देकर आधा लिटाएं।
- तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं। खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल न जाएं।
- अगर मरीज को एस्पिरिन की गोली दी जा सकती है तो चबाकर दें।
- अगर मरीज बेहोश हो जाए और सांस रुक जाए तो तुरंत सीपीआर शुरू करें। सीपीआर यानी कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन। इसमें सीने के बीचोबीच दोनों हाथों से एक मिनट में 100 से 120 बार दबाव डालें।
- सीपीआर की ट्रेनिंग हर घर के एक सदस्य को जरूर होनी चाहिए।
सीपीआर क्यों जरूरी है
सडन कार्डियक अरेस्ट में मरीज को बचाने के लिए सिर्फ 4 से 5 मिनट होते हैं। अगर इस समय में सीपीआर मिल जाए तो मरीज की जान बच सकती है। इसलिए स्कूल, कॉलेज, ऑफिस और घर में सीपीआर की ट्रेनिंग जरूरी है।
निष्कर्ष
हार्ट अटैक कोई अचानक आने वाली बीमारी नहीं है। यह हमारी सालों की गलत दिनचर्या, गलत खानपान और लापरवाही का परिणाम है। हम जो खा रहे हैं, जो पी रहे हैं, जिस बर्तन में पका रहे हैं और जिस तरह सो रहे हैं, वह सब हमारे दिल को धीरे धीरे खोखला कर रहा है।
अगर हम आज से प्रोटीन बढ़ाएं, रिफाइंड तेल बंद करें, नॉन स्टिक बर्तन हटाएं, समय पर सोएं, व्यायाम करें और तनाव कम करें तो हार्ट अटैक के खतरे को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।
दिल एक ऐसा अंग है जो कभी छुट्टी नहीं लेता। यह जन्म से मृत्यु तक लगातार धड़कता रहता है। इसलिए इसकी देखभाल करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। अगर हम इसे अनदेखा करेंगे तो एक दिन यह धड़कना बंद कर देगा और उस दिन हमारे पास पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
इसलिए आज ही अपनी दिनचर्या बदलें, अपनी रसोई बदलें और अपनी सोच बदलें। अपने दिल की बात सुनें और अपने दिल का ख्याल रखें।


