gold-investment-tips-hindi

Gold Investment Tips in Hindi

सोना सिर्फ गहना या बचत का साधन नहीं रह गया है। आज सोना पूरी अर्थव्यवस्था का आईना बन चुका है। जब भी दुनिया की अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल होती है, जब भी डॉलर कमजोर होता है, जब भी युद्ध या राजनीतिक तनाव बढ़ता है, सोना चमकने लगता है। पिछले कुछ समय से सोना लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। ऐसे में हर निवेशक के मन में यह सवाल उठता है कि क्या सोने में निवेश करने का अभी भी मौका है या समय निकल चुका है।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि सोना कब खरीदें, कितना खरीदें और क्यों खरीदें। साथ ही यह भी जानेंगे कि अमेरिका के बढ़ते कर्ज़ का सोने की कीमत से क्या गहरा संबंध है।

सोने में निवेश की योजना

सोने में निवेश करने से पहले कुछ बातों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। बिना योजना के किया गया निवेश नुकसानदायक हो सकता है।

पहली बात यह समझें कि सोना एक दीर्घकालिक निवेश है। अगर आप दो से पांच साल का नजरिया रखकर चलते हैं तो सोना आपको अच्छा रिटर्न दे सकता है। शॉर्ट टर्म में सोने की कीमत में भारी उतार-चढ़ाव आता रहता है। इसलिए जो लोग एक-दो महीने में मुनाफा कमाना चाहते हैं, उनके लिए सोना सही विकल्प नहीं है।

दूसरी बात यह है कि अपने पोर्टफोलियो का एक तय हिस्सा ही सोने में लगाएं। पहले विशेषज्ञ बीस प्रतिशत तक सोना रखने की सलाह देते थे। लेकिन अब बदलती वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए तीस से चालीस प्रतिशत तक सोना रखा जा सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी जोखिम लेने की क्षमता कितनी है और आपके पास कितना पैसा है।

तीसरी बात यह है कि सोना खरीदने का तरीका बहुत मायने रखता है। एक साथ पूरा पैसा लगाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके खरीदें। इसे स्टैगर्ड परचेस कहते हैं। जब भी कीमत में गिरावट आए, थोड़ा सोना खरीद लें। इससे आपका औसत खर्च कम हो जाता है और जोखिम भी बंट जाता है।

चौथी बात यह है कि सोना खरीदने के विकल्प कई हैं। फिजिकल गोल्ड यानी असली सोना, गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड म्यूचुअल फंड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और डिजिटल गोल्ड। हर विकल्प के अपने फायदे और नुकसान हैं। फिजिकल गोल्ड में सुरक्षा की चिंता रहती है लेकिन संकट के समय यही सबसे भरोसेमंद साबित होता है। गोल्ड ईटीएफ में लिक्विडिटी अच्छी होती है लेकिन यह इंटरनेट और सर्वर पर निर्भर करता है।

सोना कब खरीदें और कब बेचें

सोना खरीदने और बेचने का सही समय तय करना बहुत महत्वपूर्ण है। गलत समय पर खरीदने या बेचने से नुकसान हो सकता है।

सोना खरीदने के लिए सही समय तब होता है जब कीमत में गिरावट आ रही हो। जब भी सोने का भाव नीचे जाए, उसे खरीदने का मौका समझें। जो लोग यह सोचते हैं कि कीमत और गिरेगी और वे इंतजार करते रह जाते हैं, उनके हाथ से मौका निकल जाता है। इसलिए थोड़ा-थोड़ा करके खरीदते रहना सबसे समझदारी भरा कदम है।

शादी-ब्याह या त्योहार के लिए सोना खरीदना है तो भी यही तरीका अपनाएं। एक दिन कंगन खरीद लें, कुछ दिन बाद अंगूठी खरीद लें, फिर चेन या हार खरीद लें। इससे कीमत के उतार-चढ़ाव का असर कम पड़ता है।

सोना बेचने का सही समय तब होता है जब आपको पैसे की जरूरत हो और आपके पास पुराना सोना पड़ा हो जिसमें अच्छा मुनाफा हो चुका हो। लेकिन अगर आपका मकसद भविष्य को सुरक्षित करना है तो सोना बेचने की जल्दबाजी न करें। जब तक कोई मजबूरी न हो, सोने को बनाए रखें।

एक और बात ध्यान रखें कि सोने की कीमत को शॉर्ट टर्म में भविष्यवाणी करना बहुत मुश्किल है। कभी कीमत ऊपर जाती है, कभी नीचे आती है। इसलिए घबराकर फैसला न लें। धैर्य रखें और लंबी अवधि के लिए निवेश करें।

सोने में निवेश करते समय सावधानियां

सोने में निवेश करना आसान लगता है लेकिन इसमें कुछ सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है।

पहली सावधानी यह है कि हमेशा शुद्धता की जांच करें। सोना खरीदते समय हॉलमार्क देखना न भूलें। आजकल नौ कैरेट का सोना भी बिक रहा है जो कम शुद्ध होता है। अगर आप निवेश के मकसद से सोना खरीद रहे हैं तो चौबीस कैरेट सोना खरीदें। गहने बनवाने के लिए बाईस कैरेट ठीक है लेकिन निवेश के लिए नहीं।

दूसरी सावधानी यह है कि मेकिंग चार्जेस और टैक्स को ध्यान में रखें। गहने खरीदने पर मेकिंग चार्जेस लगते हैं जो कभी-कभी दस से बीस प्रतिशत तक हो सकते हैं। इससे आपका असली रिटर्न कम हो जाता है। अगर सिर्फ निवेश करना है तो सिक्के या बार खरीदें या गोल्ड ईटीएफ चुनें।

तीसरी सावधानी यह है कि सोने को सुरक्षित जगह रखें। फिजिकल गोल्ड चोरी होने का डर रहता है। बैंक लॉकर में रखें या घर में सुरक्षित जगह पर रखें। डिजिटल गोल्ड या ईटीएफ में यह चिंता नहीं रहती लेकिन उसमें दूसरी तरह के जोखिम हैं।

चौथी सावधानी यह है कि सोने को लेकर अफवाहों और अटकलों पर ध्यान न दें। कई लोग ज्योतिष या अंदाजे के आधार पर सोने की कीमत की भविष्यवाणी करते हैं। इनसे बचें। सिर्फ आर्थिक विश्लेषण और तथ्यों के आधार पर फैसला लें।

पांचवीं सावधानी यह है कि अपनी जरूरत से ज्यादा सोना न खरीदें। सोना एक निवेश है लेकिन यह आपकी सारी बचत नहीं होनी चाहिए। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट और प्रॉपर्टी में भी निवेश करें। सोना सिर्फ एक हिस्सा होना चाहिए, पूरा पोर्टफोलियो नहीं।

नुकसान की संभावनाएं

सोने में निवेश करने पर नुकसान की संभावनाएं भी होती हैं। इन्हें जानना और समझना बहुत जरूरी है।

पहला नुकसान यह हो सकता है कि अगर आपने ऊंची कीमत पर सोना खरीद लिया और कीमत गिर गई तो आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। जैसे अगर किसी ने एक लाख तिरसठ हजार रुपये पर सोना खरीदा और कीमत एक लाख पचास हजार पर आ गई तो उसे नुकसान हुआ। इसलिए एक साथ पूरा पैसा न लगाएं।

दूसरा नुकसान यह हो सकता है कि अगर आपने गहने के रूप में सोना खरीदा और बेचना चाहा तो मेकिंग चार्जेस और शुद्धता में कटौती के कारण आपको कम पैसे मिलेंगे। गहने बेचने पर अक्सर बहुत कम कीमत मिलती है।

तीसरा नुकसान यह हो सकता है कि अगर आपने डिजिटल गोल्ड या ईटीएफ में निवेश किया और इंटरनेट या सर्वर बंद हो गया तो आप अपने निवेश तक नहीं पहुंच पाएंगे। युद्ध या बड़े संकट की स्थिति में यह समस्या गंभीर हो सकती है।

चौथा नुकसान यह हो सकता है कि अगर आपने उधार लेकर या जरूरी पैसे लगाकर सोना खरीदा और कीमत गिर गई तो आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। इसलिए कभी भी उधार का पैसा सोने में न लगाएं।

पांचवां नुकसान यह हो सकता है कि अगर सोने की कीमत लंबे समय तक एक जगह रुकी रहे तो आपका पैसा फंस जाता है। इस दौरान अगर आपने वही पैसा किसी और निवेश में लगाया होता तो शायद ज्यादा रिटर्न मिलता।

लेकिन इन नुकसानों के बावजूद सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है। खासकर संकट के समय में सोना ही सबसे भरोसेमंद साबित होता है।

अमेरिका के कर्ज़ का सोने से संबंध

अमेरिका पर हर रोज पांच हजार करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ रहा है। यह इतना बड़ा आंकड़ा है कि इसे समझना मुश्किल है। पूरी दुनिया इस समय तीन सौ तिरपन ट्रिलियन डॉलर के कर्ज के बम पर बैठी है। अगर इसे डॉलर में लिखना हो तो तीन सौ तिरसठ के आगे बारह शून्य लगाने पड़ेंगे।

अमेरिका अपने रक्षा बजट से भी ज्यादा पैसा सिर्फ अपने कर्ज को उतारने में खर्च कर रहा है। यह स्थिति बहुत चिंताजनक है। जिस दिन यह कर्ज का बम फटेगा, उस दिन पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में डोमिनो इफेक्ट देखने को मिलेगा। एक के बाद एक देश दिवालिया होने लगेंगे।

जब अमेरिका का कर्ज बढ़ता है तो डॉलर कमजोर होता है। जब डॉलर कमजोर होता है तो सोना मजबूत होता है। यह सीधा संबंध है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक यह समझ चुके हैं और इसीलिए वे लगातार सोना खरीद रहे हैं।

चीन, रूस, भारत और कई अन्य देशों के केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोना बढ़ा रहे हैं। वे डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। इसे डीडोलराइजेशन कहते हैं। जैसे-जैसे डॉलर की बादशाहत खत्म होगी, वैसे-वैसे सोना चमकेगा।

अमेरिका के कर्ज का एक और पहलू यह है कि जब अमेरिका कर्ज लेता है तो उसे चुकाने के लिए वह और नोट छापता है। ज्यादा नोट छापने से महंगाई बढ़ती है। महंगाई बढ़ने से करेंसी की कीमत गिरती है। और जब करेंसी गिरती है तो लोग सोने की तरफ भागते हैं।

एक और बात यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व को खुली धमकी दी है कि या तो ब्याज दरें कम करो या मैं व्यापार बंद कर दूंगा। यह बहुत असामान्य बात है क्योंकि संवैधानिक रूप से कोई भी सरकार फेड के स्वतंत्र कामकाज में दखल नहीं देती। लेकिन ट्रंप ने दिया।

अगर फेड ब्याज दरें कम करता है तो सोना और ऊपर जाएगा। अगर नहीं करता तो अमेरिका में बड़ी उथल-पुथल होगी। किसी भी स्थिति में सोना फायदे में रहेगा। यही कारण है कि विशेषज्ञ आने वाले समय में सोने को लेकर बहुत आशावादी हैं।

विश्व प्रसिद्ध निवेशक थॉमस कैप्लन ने तो यहां तक भविष्यवाणी कर दी है कि सोना पंद्रह लाख रुपये प्रति दस ग्राम तक पहुंच जाएगा। यानी अभी जहां सोना खड़ा है, उससे दस गुना ज्यादा। यह भविष्यवाणी भले ही बहुत बड़ी लगती है लेकिन इसके पीछे की तर्क को समझना जरूरी है।

एक और बात यह है कि धरती में सोने का भंडार सीमित है। लगभग पैंसठ हजार टन सोना बचा है। हर साल तीन से पांच हजार टन निकाला जा रहा है। इस हिसाब से दो हजार उनतालीस या चालीस तक सोने की खदानें खत्म हो जाएंगी। जब सोना मिलेगा ही नहीं तो कीमत कितनी बढ़ेगी, यह सोचने वाली बात है।

निष्कर्ष

सोना एक ऐसा निवेश है जो संकट के समय में आपका सबसे बड़ा सहारा बन सकता है। लेकिन इसमें निवेश करने से पहले कुछ बातें ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।

पहली बात यह कि सोना दीर्घकालिक निवेश है। दो से पांच साल का नजरिया रखें। दूसरी बात यह कि अपने पोर्टफोलियो का तीस से चालीस प्रतिशत तक हिस्सा सोने में लगाया जा सकता है। तीसरी बात यह कि थोड़ा-थोड़ा करके खरीदें, एक साथ नहीं। चौथी बात यह कि शुद्धता और मेकिंग चार्जेस का ध्यान रखें। पांचवीं बात यह कि उधार का पैसा सोने में न लगाएं।

अमेरिका का बढ़ता कर्ज, कमजोर होता डॉलर, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सीमित होता सोने का भंडार ये सभी कारण बताते हैं कि आने वाले समय में सोने की कीमत और बढ़ सकती है। लेकिन यह कोई गारंटी नहीं है। बाजार में जोखिम हमेशा रहता है।

इसलिए बिना सोचे-समझे निवेश न करें। अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। अपनी जरूरत और क्षमता के अनुसार ही सोना खरीदें। और सबसे जरूरी बात यह कि सोना ही सब कुछ नहीं है। अपने पैसे को अलग-अलग जगहों पर बांटकर निवेश करें ताकि जोखिम कम हो और रिटर्न अच्छा मिले।

सोना तब चमकता है जब बाकी सब अंधेरा हो जाता है। इसलिए अपने पोर्टफोलियो में सोने को जगह जरूर दें। लेकिन समझदारी से दें।

Leave a Comment

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top